भारत सरकार अधिनियम 1858 एवं भारत परिषद अधिनियम 1861

0
5
भारत सरकार अधिनियम 1858

भारत सरकार अधिनियम 1858 एवं भारत परिषद अधिनियम 1861- ईस्ट इण्डिया कम्पनी के शासन के विरुद्ध भारत की जनता में असंतोष की भावना थी तथा वे लगातार इसके विरुद्ध आन्दोलन कर रहे थे। 1857 की क्रांति इसी असंतोष की भावना का परिणाम था, यह आन्दोलन असाधारण था तथा यही भारत में कंपनी के साम्राज्य को ख़त्म करने के लिए महत्वपूर्ण और तात्कालिक कारण सिद्ध हुआ। इसके अतिरिक्त ब्रिटेन के सुधारवादी लोग लगातार यह मांग कर रहे थे कि भारत जैसे विशाल देश का शासन East India Company जैसी व्यापारिक संस्था के हाथों में नहीं सौंपा जाना चाहिये, क्योंकि Company में भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुँच गयी थी जिससे ब्रिटेन की सरकार को भारत से आर्थिक लाभ नही मिल पा रहा था।

परीक्षा की दृष्टीकोण से आप यह याद रखें की भ्रष्टाचार एवं क्रूरतापूर्ण शासन के कारण East India Company के शासन के विरुद्ध भारत के साथ-साथ ब्रिटेन में भी आवाज उठने लगी थी। यही कारण है की Company के अंतिम Charter Act 1853 में Company के शासन की निश्चित अवधि तय नही की गई।

भारत सरकार अधिनियम 1858 (Government of India Act 1858)

अगस्त 1858 में ब्रिटिश संसद ने एक अधिनियम पारित किया जिसके तहत भारत का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी से छीनकर क्राउन (महारानी) को दे दिया गया, इस समय विक्टोरिया ब्रिटेन की महारानी थीं। इस Act को भारत सरकार अधिनियम 1858 की संज्ञा दी गई। प्रशासन हेतु ब्रिटेन में भारत सचिव नियुक्त किया गया जो महारानी के प्रति जवाबदेह होता था एवं भारत सचिव के प्रति भारत का गवर्नर जनरल जवाबदेह होता था।

भारत सरकार अधिनियम 1858 के मुख्य प्रावधान

इस एक्ट को शिक्षित भारतीयों के वर्ग के द्वारा अपने अधिकारों का मैग्नाकार्ट कहा गया क्योंकि इस एक्ट के द्वारा कंपनी के क्रूरतापूर्ण शासन को समाप्त करके ब्रिटेन की महारानी को सौंप दिया गया, इस एक्ट में निम्नलिखित प्रमुख प्रावधान किये गये थे –

  • भारत में कंपनी का शासन समाप्त करके शासन ब्रिटिश महारानी क्राउन को दे दिया गया।
  • इसी के साथ ही भारत के शासन पर इंग्लैंड की संसद का सीधा व प्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित हो गया।
  • ब्रिटिश संसद में भारत मंत्री का पद एवं BOC व BOD को ख़त्म करके 15 सदस्यीय भारतीय परिषद का गठन किया गया।

15 सदस्यीय भारतीय परिषद

  • गवर्नर जनरल का नाम बदलकर वायसराय कर दिया गया, जो की भारत सचिव के प्रति जवाबदेह था (Note – लार्ड कैनिंग पहले वायसराय थे)

स्मरणीय तथ्य- याद रखें इस Act के तहत 15 सदस्यों की एक परिषद की सहायता से भारत में ब्रिटिश सरकार द्वारा शासन किया जाता था, जिसे भारत परिषद के नाम से जाना जाता था एवं इस परिषद में भारतीय जनता का कोई भी स्थान नही था।

भारत परिषद अधिनियम 1861 (Indian Council Act 1861)

अब तक भारत में अपराधों एवं विवाद आदि के निपटारे के लिए कोई ठोस कानून नहीं बनाया गया था, एवं 1857 की क्रांति और भारतीयों में लगातार बढ़ते हुए असंतोष की भावना के कारण ठोस कानून बनाने की आवश्कता महसूस की गई जिसके फलस्वरूप भारत परिषद अधिनियम 1861 ब्रिटिश संसद में पारित की गई। इस Act का दूसरा उद्देश्य देश के प्रशासन में भारतीयों को शामिल करना भी था।

भारत परिषद अधिनियम 1861 के मुख्य प्रावधान

जैसा की यह एक्ट भारतीयों को नियंत्रित करने हेतु लाया गया था अतः नियंत्रण पद्धति अपनाने हेतु निम्न तीन कानूनों को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया-

  • IPC – Indian Panel Code (भारतीय दंड संहिता)
  • CRPC – Criminal Procedure Code
  • CPC – Civil Procedure Code (जमीन जायजाद सम्बन्धी)

इसके अतिरिक्त निम्न प्रावधान इस एक्ट के तहत किये गये-

  1. वायसराय (गवर्नर जनरल) को अध्यादेश जारी करने का अधिकार तथा भारत परिषद् में भारतीय जनता के बीच से प्रतिनिधि नामजद करने का अधिकार दिया गया। (Note – अध्यादेश कानून बनाने की शक्ति होती है)
  2. प्रशासकीय कार्यों में विभागीय प्रणाली की शुरुवात की गयी।
  3. वायसराय को बजट प्रस्तुत करने की शक्ति दी गयी।

भारत परिषद अधिनियम 1861 के प्रमुख प्रभाव

1861 के भारत परिषद अधिनियम के निम्नलिखित प्रभाव वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था में देखने को मिलती है-

  1. वर्तमान कानून व्यवस्था में भी IPC, CRPC व CPC का अस्तित्व है।
  2. राष्ट्रपति को अनु. 123 तथा राज्यपाल को अनु. 213 के तहत अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है।
  3. वर्तमान में भी राष्ट्रपति को विभागीय या मंत्रालय गठन की शक्ति प्राप्त है।
  4. बजट प्रस्तुत करने की व्यवस्था की शुरुवात इस एक्ट से की गयी थी।

याद रखें भारत परिषद अधिनियम 1861 में पहली बार भारत परिषद् में भारतीय जनता के बीच से प्रतिनिधि नामजद करने की शुरुवात की गई, यहीं से भारतीय जनता का ब्रिटिश शासन व्यवस्था में भागीदारी की शुरुवात हुई।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here